"हमारे देश को जरुरत है कि तीनो सेनाओं में अधिकाधिक संख्या में महिलाएं भाग लें, नारी सशक्तिकरण को अपना प्रमुख मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर बहन मायावती राजनीति में , कटरीना कैफ सिनेमा की दुनिया में , पूनम पाण्डेय ट्विट्टर की दुनिया में धूम मचा सकती हैं, तो आर्मी में क्यूँ नहीं| जब सब फ्रंट्स पे महिला पुरुष को टक्कर दे सकती है तो आर्मी के फ्रंट पे क्यूँ नहीं? ” उन्होंने ये भी कहा कि समाज में महिलाएं विकास कर रही हैं और उनको दबा पाना अब उतना आसान काम नहीं है | उन्होंने उदहारण देते हुए कहा कि कनिमोझी को हाई कोर्ट से बेल मिलना इस बात का सबूत है कि नारी के कमजोर होने का अब कोई फायदा नहीं उठा सकता| उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी महिलाएं जैसे कि कटरीना कैफ, याना गुप्ता, निगार खान, वीणा मालिक, नर्गिस फाखरी भारत को महिलाओं के लिए एक अच्छा कार्यक्षेत्र मानती हैं| उन्होंने लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का नाम लेते हुए कहा कि उस महिला ने बिना कभी कोई आवाज़ निकाले संसद के दो साल निकाल दिए और उनकी वजह से संसद का कार्य बिना किस मार पिटाई के चल रहा है | अन्यथा दादा सोमनाथ के टाइम पर तो आदमी कि जान पे बन आती थी | उन्होंने गोल मोल शब्दो में ये भी कहा कि देश कि बागडोर आज जिस पुरुष के हाथ में है उसकी बागडोर भी एक महिला के ही हाथ में है| "
प्रतिभा पाटिल ने पटियाला में आर्मी के एक सम्मान समारोह में शिरकत करते हुए ये बातें फेकिंग न्यूज़ के संवाददाता अनर्गल प्रलापी को बताई| राष्ट्रपति महोदया ने फेकिंग न्यूज़ को कभी भी किसी भी वक़्त कहीं भी इंटरव्यू लेने की अनुमति प्रदान की थी परन्तु फेकिंग न्यूज़ के अत्यधिक व्यस्त होने के कारण ये इंटरव्यू टलता ही जा रहा था| सम्मान समारोह के लिए सजाये गए रंगारंग स्टेज पर थलसेनाध्यक्ष वी के मालिक भी अपने सिपहसलारों के साथ मौजूद थे |
राष्ट्रपति महोदया इस पूरे समारोह को लेकर थोड़ी चिंतित थीं क्यूंकि कसाब की तीसरी वर्षगाँठ के दौरान कुछ रिटायर्ड फौजियों ने उनसे अफज़ल गुरु और कसाब की मर्सी प्ली की जानकारी मांगी थी जिसके चलते वो पूरा दिन दस जनपथ में छिपी रहीं | स्टेज पे चारों तरफ बंदूकों से लैस बड़ी बड़ी मूंछों और बंदूकों वाले फौजियों को देख के उनके हाथों के तोते उड़ते से दिख रहे थे| उनकी चिंता स्पष्ट रूप से उनके चेहरे पे देखी जा सकती थी| बात यहाँ तक बिगड़ गयी की राष्ट्रगान बजने पर राष्ट्रपति महोदया खड़े होना ही भूल गयी और शुरू की तीन चार लाइनें उन्होंने बैठे बैठे ही निपटा डाली| बाद में वी के मलिक द्वारा आँख का इशारा करने पे उनके चेहरे में जान आई और वो खड़े होने की हिम्मत जुटा पायीं| फेकिंग न्यूज़ को ये शक है की की अत्यधिक( निठल्लेपन) कार्यभार की वजह से उनके घुटने जाम हो चुके हें और शीघ्र ही वो भी देश छोड़ के लम्बे इलाज के लिए विदेश जा सकती हैं|
फेकिंग न्यूज़ द्वारा की गयी तहकीकात से पता चलता है की राष्ट्रगान बजने के वक़्त वो यह सोच रही थीं की उनका सम्मान कब किया जाएगा | उन्हें भेजे आमंत्रण को उन्होंने खुद पढ़ा था और उससे उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ था की सेना की पांचो रेजिमेंट उनका सम्मान करना चाहती हैं| गहरी छानबीन से ये पता चला है की उनकी चिट्ठी पत्री पढने के लिए स्पेशल नियुक्त किये गए "आई ए एस " अफसर द्वारा तीन दिन की छुट्टी लेने से ये सारी ग़लतफहमी हुई है|
मामले को सँभालते हुए वी के मलिक ने कहा की हमने राष्ट्रगान का रीमिक्स वर्जन बनवाया था जिस कारण से राष्ट्रपति को गीत पहचानने में थोड़ी दिक्कत हो गयी |
समारोह में अपेक्षा थी कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी शिरकत करेंगे पर आपरेशन ब्लू स्टार में शामिल कुछ रेजीमेंटों का सम्मान करने से ज्यादा उन्हें अपनी पटियाला कि कोठी में बैठ के पेग पटियला पीना उचित लगा|
शांति टिग्गा के बारे में पूछे जाने पे उन्होंने कहा कि राजनीतिक सवाल जवाबों से उन्हें दूर रखा जाए |
इंटरव्यू के तुरंत बाद उन्हें प्रधानमंत्री मन्दमोहन सिंह से मिलने जाना था ताकि वो संसद के शीतकालीन सदन कि रिपोर्ट ले सकें| फेकिंग न्यूज़ के संवाददाता को राष्ट्रपति ने अपनी गाड़ी में दिल्ली तक लिफ्ट दी, क्यूंकि उनका गरीब रथ का वेटिंग क्लीयर नहीं हो पाया था|
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